
पंकज मिश्र.
हम सभी किसी ना किसी रूप में वर्चस्व की लड़ाई मे निरन्तर लगे रहते हैं आखिर क्यों??
जन लोकपाल विधेयक
जन लोकपाल विधेयक भारत में प्रस्तावित भ्रष्टाचारनिरोधी विधेयक का मसौदा है। यदि इस तरह का विधेयक पारित हो जाता है तो भारत में जन लोकपाल चुनने का रास्ता साफ हो जायेगा जो चुनाव आयुक्त की तरह स्वतंत्र संस्था होगी। जन लोकपाल के पास भ्रष्ट राजनेताओं एवं नौकरशाहों पर बिना सरकार से अनुमति लिये ही अभियोग चलाने की शक्ति होगी। जस्टिस संतोष हेगड़े, प्रशांत भूषण, सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने यह बिल जनता के साथ विचार विमर्श के बाद तैयार किया है।
जन लोकपाल विधेयक के मुख्य बिन्दु
जन लोकपाल बिल की प्रमुख शर्तें
न्यायाधीश संतोष हेगड़े, प्रशांत भूषण और अरविंद केजरीवाल द्वारा बनाया गया यह विधेयक लोगों द्वारा वेबसाइट पर दी गई प्रतिक्रिया और जनता के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इस बिल को शांति भूषण, जे एम लिंग्दोह, किरण बेदी, अन्ना हजारे आदि का समर्थन प्राप्त है। इस बिल की प्रति प्रधानमंत्री और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक दिसम्बर को भेजा गया था।
1. इस कानून के अंतर्गत, केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त का गठन होगा।
2. यह संस्था निर्वाचन आयोग और सुप्रीम कोर्ट की तरह सरकार से स्वतंत्र होगी। कोई भी नेता या सरकारी अधिकारी की जांच की जा सकेगी
3. भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कई सालों तक मुकदमे लम्बित नहीं रहेंगे। किसी भी मुकदमे की जांच एक साल के भीतर पूरी होगी। ट्रायल अगले एक साल में पूरा होगा और भ्रष्ट नेता, अधिकारी या न्यायाधीश को दो साल के भीतर जेल भेजा जाएगा।
4. अपराध सिद्ध होने पर भ्रष्टाचारियों द्वारा सरकार को हुए घाटे को वसूल किया जाएगा।
5. यह आम नागरिक की कैसे मदद करेगा: यदि किसी नागरिक का काम तय समय सीमा में नहीं होता, तो लोकपाल जिम्मेदार अधिकारी पर जुर्माना लगाएगा और वह जुर्माना शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में मिलेगा।
6. अगर आपका राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट आदि तय समय सीमा के भीतर नहीं बनता है या पुलिस आपकी शिकायत दर्ज नहीं करती तो आप इसकी शिकायत लोकपाल से कर सकते हैं और उसे यह काम एक महीने के भीतर कराना होगा। आप किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार की शिकायत लोकपाल से कर सकते हैं जैसे सरकारी राशन की कालाबाजारी, सड़क बनाने में गुणवत्ता की अनदेखी, पंचायत निधि का दुरुपयोग। लोकपाल को इसकी जांच एक साल के भीतर पूरी करनी होगी। सुनवाई अगले एक साल में पूरी होगी और दोषी को दो साल के भीतर जेल भेजा जाएगा।
7. क्या सरकार भ्रष्ट और कमजोर लोगों को लोकपाल का सदस्य नहीं बनाना चाहेगी? ये मुमकिन नहीं है क्योंकि लोकपाल के सदस्यों का चयन न्यायाधीशों, नागरिकों और संवैधानिक संस्थानों द्वारा किया जाएगा न कि नेताओं द्वारा। इनकी नियुक्ति पारदर्शी तरीके से और जनता की भागीदारी से होगी।
8. अगर लोकपाल में काम करने वाले अधिकारी भ्रष्ट पाए गए तो? लोकपाल / लोकायुक्तों का कामकाज पूरी तरह पारदर्शी होगा। लोकपाल के किसी भी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत आने पर उसकी जांच अधिकतम दो महीने में पूरी कर उसे बर्खास्त कर दिया जाएगा।
9. मौजूदा भ्रष्टाचार निरोधक संस्थानों का क्या होगा? सीवीसी, विजिलेंस विभाग, सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (अंटी कारप्शन डिपार्टमेंट) का लोकपाल में विलय कर दिया जाएगा। लोकपाल को किसी न्यायाधीश, नेता या अधिकारी के खिलाफ जांच करने व मुकदमा चलाने के लिए पूर्ण शक्ति और व्यवस्था भी होगी।
सरकारी बिल और जनलोकपाल बिल में मुख्य अंतर
सरकारी लोकपाल के पास भ्रष्टाचार के मामलों पर ख़ुद या आम लोगों की शिकायत पर सीधे कार्रवाई शुरु करने का अधिकार नहीं होगा. सांसदों से संबंधित मामलों में आम लोगों को अपनी शिकायतें राज्यसभा के सभापति या लोकसभा अध्यक्ष को भेजनी पड़ेंगी. वहीं प्रस्तावित जनलोकपाल बिल के तहत लोकपाल ख़ुद किसी भी मामले की जांच शुरु करने का अधिकार रखता है. इसमें किसी से जांच के लिए अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं है सरकार द्वारा प्रस्तावित लोकपाल को नियुक्त करने वाली समिति में उपराष्ट्रपति. प्रधानमंत्री, दोनो सदनों के नेता, दोनो सदनों के विपक्ष के नेता, क़ानून और गृह मंत्री होंगे. वहीं प्रस्तावित जनलोकपाल बिल में न्यायिक क्षेत्र के लोग, मुख्य चुनाव आयुक्त, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, भारतीय मूल के नोबेल और मैगासेसे पुरस्कार के विजेता चयन करेंगे ।
राज्यसभा के सभापति या स्पीकर से अनुमति
सरकारी लोकपाल के पास भ्रष्टाचार के मामलों पर ख़ुद या आम लोगों की शिकायत पर सीधे कार्रवाई शुरु करने का अधिकार नहीं होगा. सांसदों से संबंधित मामलों में आम लोगों को अपनी शिकायतें राज्यसभा के सभापति या लोकसभा अध्यक्ष को भेजनी पड़ेंगी.वहीं प्रस्तावित जनलोकपाल बिल के तहत लोकपाल ख़ुद किसी भी मामले की जांच शुरु करने का अधिकार रखता है. इसमें किसी से जांच के लिए अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं है.सरकारी विधेयक में लोकपाल केवल परामर्श दे सकता है. वह जांच के बाद अधिकार प्राप्त संस्था के पास इस सिफ़ारिश को भेजेगा. जहां तक मंत्रीमंडल के सदस्यों का सवाल है इस पर प्रधानमंत्री फ़ैसला करेंगे. वहीं जनलोकपाल सशक्त संस्था होगी. उसके पास किसी भी सरकारी अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की क्षमता होगी.सरकारी विधेयक में लोकपाल के पास पुलिस शक्ति नहीं होगी. जनलोकपाल न केवल प्राथमिकी दर्ज करा पाएगा बल्कि उसके पास पुलिस फ़ोर्स भी होगी.सरकारी विधेयक में लोकपाल केवल परामर्श दे सकता है. वह जांच के बाद अधिकार प्राप्त संस्था के पास इस सिफ़ारिश को भेजेगा. जहां तक मंत्रीमंडल के सदस्यों का सवाल है इस पर प्रधानमंत्री फ़ैसला करेंगे. वहीं जनलोकपाल सशक्त संस्था होगी. उसके पास किसी भी सरकारी अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की क्षमता होगी.सरकारी विधेयक में लोकपाल के पास पुलिस शक्ति नहीं होगी. जनलोकपाल न केवल प्राथमिकी दर्ज करा पाएगा बल्कि उसके पास पुलिस फ़ोर्स भी होगी
अगर कोई शिकायत झूठी पाई जाती है तो सरकारी विधेयक में शिकायतकर्ता को जेल भी भेजा जा सकता है. लेकिन जनलोकपाल बिल में झूठी शिकायत करने वाले पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है.
सरकारी विधेयक में लोकपाल का अधिकार क्षेत्र सांसद, मंत्री और प्रधानमंत्री तक सीमित रहेगा. जनलोकपाल के दायरे में प्रधानमत्री समेत नेता, अधिकारी, न्यायाधीश सभी आएँगे.
लोकपाल में तीन सदस्य होंगे जो सभी सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे. जनलोकपाल में 10 सदस्य होंगे और इसका एक अध्यक्ष होगा. चार की क़ानूनी पृष्टभूमि होगी. बाक़ी का चयन किसी भी क्षेत्र से होगा.
सरकार द्वारा प्रस्तावित लोकपाल को नियुक्त करने वाली समिति में उपराष्ट्रपति. प्रधानमंत्री, दोनो सदनों के नेता, दोनो सदनों के विपक्ष के नेता, क़ानून और गृह मंत्री होंगे. वहीं प्रस्तावित जनलोकपाल बिल में न्यायिक क्षेत्र के लोग, मुख्य चुनाव आयुक्त, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, भारतीय मूल के नोबेल और मैगासेसे पुरस्कार के विजेता चयन करेंगे.लोकपाल की जांच पूरी होने के लिए छह महीने से लेकर एक साल का समय तय किया गया है. प्रस्तावित जनलोकपाल बिल के अनुसार एक साल में जांच पूरी होनी चाहिए और अदालती कार्यवाही भी उसके एक साल में पूरी होनी चाहिए.
सरकारी लोकपाल विधेयक में नौकरशाहों और जजों के ख़िलाफ़ जांच का कोई प्रावधान नहीं है. लेकिन जनलोकपाल के तहत नौकरशाहों और जजों के ख़िलाफ़ भी जांच करने का अधिकार शामिल है. भ्रष्ट अफ़सरों को लोकपाल बर्ख़ास्त कर सकेगा.
सरकारी लोकपाल विधेयक में दोषी को छह से सात महीने की सज़ा हो सकती है और धोटाले के धन को वापिस लेने का कोई प्रावधान नहीं है. वहीं जनलोकपाल बिल में कम से कम पांच साल और अधिकतम उम्र क़ैद की सज़ा हो सकती है. साथ ही धोटाले की भरपाई का भी प्रावधान है.
ऐसी स्थिति मे जिसमें लोकपाल भ्रष्ट पाया जाए, उसमें जनलोकपाल बिल में उसको पद से हटाने का प्रावधान भी है. इसी के साथ केंद्रीय सतर्कता आयुक्त, सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा सभी को जनलोकपाल का हिस्सा बनाने का प्रावधान भी है.
चॉकलेट का इतिहास काफी पुराना है। इसकी शुरुआत कब हुई और इसकी खोज किसने की इस बारे में सही-सही बता पाना तो मुश्किल है क्योंकि यह एक दिन या किसी एक व्यक्ति का परिणाम नहीं था। फिर भी अध्ययन एवं साक्ष्य बताते हैं कि सर्वप्रथम `एजटेक´ के लोगों ने खोजा था कि कोकोआ की फलियों को कूट-पीस कर तथा दूसरे मसालों के साथ मिलाकर एक स्वास्थ्यवर्धक पेय बनाया जा सकता है।
सन् 1519 में स्पेन के प्रसिद्ध अन्वेषक हरनान्डो कोटेZस को मेिक्सको के शासक मोन्टेजुमा के दरबार में यह विशेष पेय परोसा गया। उन्होंने स्पेन को इसके स्वाद से अवगत कराया। मीठे व सुगंधित पदार्थ, दालचीनी, वनिला आदि मिलाकर गर्मागर्म पीये जाने वाले इस पेय की विधि को स्पेन ने सैकड़ों वषोZं तक गोपनीय रखा। फिर इसके बारे में फ्रांस तथा धीरे-धीरे यूरोप के अन्य देश भी जान गए और इसका स्वाद बढ़ाते हुए उपभोग करने लगे। जिसके फलस्वरूप इसकी लोकप्रियता एक महंगे विलासिता के साधन के रूप में तेजी से बढ़ने लगी।
शुरु में चॉकलेट तरल रूप में ही रही, परन्तु 18 वीं सदी के प्रथम दशक में `मॉिल्डंग´ तकनीक की खोज के बाद ठोस चॉकलेट प्रसिद्ध होने लगी। मशीनों में कूटी-पीसी गई कोको की फलियों से महीन चूर्ण बनाकर उसे गर्म किया जाता और सांचों में ढाल कर चॉकलेट बनायी जाती। अमेरिका में 1765 को डोरचेस्टर (मैसाचुसेट्स) के निकट `मिल्टन लोअर मिल्स´ में पहली बार चॉकलेट का निर्माण किया गया। सन् 1825 में डचमैन कोनराड वान हूटेन ने `कोकोआ बटर´ तैयार करने की शुरुआत कर दी। कोकोआ बटर करीब 97 डिग्री फैरेनहाइट के तापमान पर पिघलने लगता है जोकि मानव शरीर का सामान्य तापमान होता है। यही कारण है कि चॉकलेट मुंह में जाकर पिघलने लगती है।
सन् 1875 में स्विट्जरलैण्ड के डैनियल पीटर ने `मिल्क चॉकलेट´ की शुरुआत की जो पहले से चली आ रही `डॉर्क चॉकलेट´ की तुलना में अधिक स्वादिष्ट, मीठी व चिकनी थी। फिर तो चॉकलेट का जादूभरा स्वाद सबकी जबान पर चढ़ गया और नयी-नयी कंपनियां इस क्षेत्र में आने लगी। सन् 1905 में `कैडब्रिज´ की `डेरी मिल्क´ सर्वाधिक प्रसिद्ध चॉकलेट बन गई। वर्तमान में मिल्क चॉकलेट के ही सर्वाधिक उत्पाद बिकते व पसन्द किये जाते हैं। आज हालत यह है कि चॉकलेट का प्रयोग बिस्किट, कैण्डी, ब्रेड और मिठाई आदि कई अन्य उत्पादों में भी किया जाने लगा है।
वैसे तो कमोबेश लगभग प्रत्येक देश में ही चॉकलेट खायी व सराही जाती है, लेकिन फिर भी चॉकलेट के प्रति ब्रिटेनवासियों की दीवानगी इस हद तक पहुंच चुकी है कि पूरे यूरोप में सबसे अधिक चॉकलेट का उपभोग ब्रिटेन के लोग ही करते हैं। भोजन और पेय से सम्बंधित मार्केट ट्रेण्ड का विश्लेषण करने वाली एक कंपनी के अनुसार ब्रिटेन में एक व्यक्ति एक साल में औसतन 11.2 किलोग्राम चॉकलेट खाता है। यूरोप के अन्य देशों में दूसरे स्थान पर बेिल्जयम है जहां यह मात्रा 8.4 किलोग्राम है। अमेरिका में यह दर 5.3 किलोग्राम है।
स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है चॉकलेट
सामान्यत: चॉकलेट में प्रोटीन, वसा, विटामिन ई, कैल्सियम, फास्फोरस, मैग्निशियम और लोहा आदि जैसे खनिज तत्व होते हैं। वैसे तो इसमें 300 से भी अधिक रासायनिक तत्व होते हैं, लेकिन अभी इन सभी के बारे में ज्ञात नहीं हो सका है कि इनका शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसके निर्माण में प्रयुक्त होने वाली कोकोआ में ही 20 प्रतिशत प्रोटीन, 40 प्रतिशत काबोहाइड्रेट और 40 प्रतिशत वसा होता है।
इसमें उपस्थित `थिओब्रोमाइन´ की प्रकृति `कैफीन´ से मिलती है। ग्रीक शब्द `थिओब्रोमा´ का अर्थ होता है `देवताओं का भोजन´। प्राचीन एजटेक कोको वृक्ष के बीजों का प्रयोग मुद्रा के रूप में किया करते थे। वे इस वृक्ष को शक्ति व समृद्धिदायक मानते थे। आधुनिक शोध भी बताते हैं कि चॉकलेट स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी हो सकती है। चॉकलेट खाने से शरीर में दर्द का अहसास कम करा कर प्रसन्नता का अनुभव कराने वाला हार्मोन `एण्डोफिZन´ उत्सर्जित होने लगता है जोकि तनाव आदि की स्थिति में भी हमारे शरीर में प्राकृतिक दर्द निवारक का काम करता है। इसके अलावा बहुत-से अन्य रोगों में भी चॉकलेट लाभ पहुंचाता है।
हृदय रोग में सहायक
कैलेफोनिZया के वैज्ञानिक प्रो. कार्ल कीन और उनके सहयोगियों का सुझाव है कि चॉकलेट हृदय रोग से लड़ने में भी सहायक हो सकती है। उनका कहना है कि चॉकलेट में ऑक्सीकरणरोधी `फ्लेवोनॉयड´ होता है जोकि रक्त को पतला बना कर धमनियों में उसके थक्के बनने से रोकता है। जिससे हृदयाघात की आशंका कम हो जाती है।
रक्तचाप में लाभ
चॉकलेट के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के सन्दर्भ में किए गए कुछ अध्ययन बताते हैं कि गहरे रंगों वाली चॉकलेट खाने से स्वस्थ लोगों के रक्तचाप में कमी आती है और इंसुलिन के प्रति उनकी संवेदनशीलता बढ़ जाती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि गहरे रंग की चॉकलेट में बड़ी मात्रा में मौजूद फ्लेवोनॉयड अपने एंटी ऑक्सीडेंट गुणों की वजह से धमनियों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। अध्ययन बताते हैं कि गहरे रंग की चॉकलेट धमनियों के फैलने की क्षमता को बढ़ाती है और `प्लेटलेट´ के जमाव को कम कर देती है।
खांसी में मददगार
लम्बे समय से खांसी की परेशानी झेलने वाले लोगों के लिए आसान इलाज। चॉकलेट खाइए, खांसी दूर भगाइए। लन्दन के चिकित्सा शोधकर्ताओं ने कोको में मिलने वाले थियोब्रोमाइन तत्व से भरपूर ऐसी चॉकलेट तैयार की है जिसके सेवन से पुरानी खांसी से छुटकारा पाया जा सकता है। `इंपीरियल कॉलेज ऑफ लन्दन´ के शोधकर्ताओं ने अनेक लोगों पर परीक्षण करते हुए अपने शोध में पता लगाया है कि थियोब्रोमाइन खांसी से राहत दिलाने में विशेष समझे जाने वाले `कोडीन´ से भी 3 गुना अधिक प्रभावशाली होता है।
अतिसार का उपचार
हाल ही में किए गए एक वैज्ञानिक अध्ययन में पता चला है कि अतिसार या दस्त की परेशानी से निजात दिलाने में भी चॉकलेट का सेवन बहुत कारगर होता है। दरअसल, चॉकलेट में उपस्थित फ्लेवोनॉयड अतिसार की रोकथाम में उल्लेखनीय कार्य करता है तथा चॉकलेट बनाने के लिए प्रयुक्त होने वाली कोकोआ की फलियां इस स्वास्थ्यवर्धक फ्लेवोनॉयड से भरपूर होती हैं। ऑकलैण्ड स्थित `चिल्ड्रन्स हॉिस्पटल एण्ड रिसर्च सेंटर´ के शोध दल ने चॉकलेट में पाए जाने वाले फ्लेवोनॉयड तथा आन्तों पर पड़ने वाले उसके प्रभाव का अध्ययन करते हुए पाया है कि कोकोआ में उपस्थित फ्लेवोनॉयड अतिसार में भी असरदार भूमिका निभाता है। माना जा रहा है कि इस खोज से अतिसार के उपचार हेतू और भी अच्छी औषधियों के निर्माण में सहायता मिले सकेगी।
सुन्दरता के लिए चॉकलेट की मसाज
सुन्दरता बढ़ाने के लिए चॉकलेट के प्रयोग की बात खासतौर पर महिलाओं को बहुत खुश कर देगी। फ्रांस की राजधानी पेरिस के ब्यूटी पार्लरों में सुन्दरता के लिए चॉकलेट की मसाज (मालिश) की जाती है। यहां के कुछ थैरेपिस्टों का मानना है कि चॉकलेट में `एंटी एजिंग´ कारक होते हैं जिनसे चेहरे की झुरियां कम हो जाती हैं और इसके साथ-साथ शरीर में चुस्ती-फूर्ति भी आती है। चॉकलेट मसाज करने-कराने वाले लोगों का मानना है कि इससे शरीर के सभी अंगों को आराम मिलता है और दिनभर ताजगी भी रहती है। इस मसाज के लिए चॉकलेट के टब में डुबकी लगानी पड़ती है और ऐसी चॉकलेटी मसाज के दो घंटे के एक पैकेज के लिए 200 पौण्ड की फीस देनी पड़ती है। इस पैकेज में खाने के लिए चॉकलेट भी परोसा जाता है।
यह भी ध्यान रखें
कुछ लोगों का मानना है कि चॉकलेट खाने से दान्त खराब हो जाते हैं या मोटापा बढ़ता है, किन्तु कभी-कभार चॉकलेट खाने से ऐसा कुछ नहीं होता। सच्चाई तो यह है कि अति हर चीज की बुरी होती है। यदि किसी भी चीज का प्रयोग सही व सन्तुलित ढंग से न किया जाए, तो उसके परिणाम हानिकारक भी हो सकते हैं। यही बात चॉकलेट पर भी लागू होती है।
चॉकलेट का शौक रखने वाले लोगों को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि वे जिस चॉकलेट का मजा ले रहे हैं वह स्वास्थ्य की दृष्टि से भी पूरी तरह से सुरक्षित हो क्योंकि निम्न कोटि की चॉकलेट स्वाद तो दे देती है, लेकिन उसमें जिन पदार्थों का उपयोग किया जा रहा होता है वे हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करने लगते हैं। अत: चॉकलेट या किसी भी चीज का सेवन करने से पूर्व जांच लें कि उसमें प्रयुक्त होने वाले सभी रसायन व रंगादि मानक स्तर के हों।
चॉकलेट में पाए जाने वाले कुछ पदार्थ इसकी `लत´ डालने वाले सन्दिग्ध पदार्थों के रूप में देखे जाते हैं। यही कारण है कि लगातार चॉकलेट खाने की आदत के लक्षण किसी `लत´ की तरह हो सकते हैं। इसमें मन-मस्तिष्क को `प्रसन्न´ करने वाले कुछ इस प्रकार के तत्व होते हैं जोकि `ड्रग्स´ में भी पाए जाते हैं।